कोरोना महामारी ने संपूर्ण विश्व को अपने जाल में जकड़ लिया है कोई भी देश इससे अछूता नहीं है। कोरोना ने लोगों को अपने घरों में कैद होने को मजबूर कर दिया है। कोरोना की सबसे बड़ी मार प्रवासी मजदूरों पर पड़ी है क्योंकि 24 मार्च की रात से प्रधानमंत्री जी ने देश में 21 दिनों का जब संपूर्ण लॉकडाउन घोषित किया तो सबसे ज्यादा दिक्कत अलग अलग राज्यों में फंसे इन प्रवासी मजदूरों को उठानी पड़ी। करोड़ों की संख्या में ये कामगार दूसरे राज्यों में जाकर रोजी रोटी कमाते हैं बल्कि उनमें से लाखों की रातें फुटपाथों पर गुजरती हैं।
21 दिनों के इन संपूर्ण लॉकडाउन में निर्माण कार्य बंद हो गए, फैक्ट्रियां बंद हो गई, कारखाने बंद हो गए इससे इनकी रोजी रोटी पर संकट आ गया। ये एक ऐसा तबका है जो रोज कमाकर खाता है अगर नहीं कमाएगा तो खाएगा क्या। पूर्व आर्थिक सलाहकार शंकर आचार्य के मुताबिक अपने देश में 16 लाख ऐसे परिवार हैं जिनका अपना कोई आशियाना नहीं है। 5.4 करोड़ ऐसे परिवार हैं जिनकी मुख्य आमदनी का स्त्रोत दिहाड़ी मजदूरी है। लॉकडाउन में कई संगठन, समाजसेवी संस्थाएं प्रवासी मजदूरों के लिए आगे आए उनके दुख, दर्द को जाना। वे जगह जगह पर मजदूरों को भोजन, पानी उपलब्ध करा रहे थे लेकिन इन मजदूरों को कभी एक वक्त भोजन मिल पता था तो कभी मदद की आस में दिन गुजर जाता था। लॉकडाउन 1 के बाद जब लॉकडाउन 2 लागू हुआ तो उनके सब्र का बांध टूट पड़ा। बेबस, असहाय प्रवासी मजदूरों को जब स्थानीय प्रशासन और राज्य सरकार से कोई उम्मीद की आस नहीं दिखाई दी तो हजारों की तादाद में लोग अपने मूल निवास कि ओर निकलने लगे। प्रशासन उनकी संख्या के आगे बेबस पड़ गया।
क्या सरकारें इतनी सिफ़र हो गई हैं कि उन्हें भूखे, बेबस, असहाय लोगों को अपने हाल पर छोड़ देना सही है। एक लंबे अंतराल के लॉकडाउन के बाद अनलॉक 1 लागू हो गया है लाखों कामगार सैकड़ों किलोमीटर की यात्रा करके अपने-अपने घर पहुंच चुके हैं तो उनके सामने सबसे बड़ा संकट रोजी रोटी का है कई मजदूरों से जब पत्रकारों ने बात कि तो उनका कहना था कि कोरोना से नहीं तो भूख से जरूर मर जाएंगे साहब। विश्व खाद्य कार्यक्रम के कार्यकारी निदेशक के अनुसार दुनियां में हर रात 82.10 करोड़ लोग भूखे पेट सोते हैं। अभी दुनियां के 13.50 करोड़ लोग भुखमरी का सामना कर रहे हैं।
आज हम दुनियां के उन शीर्ष देशों में हमारा नाम दर्ज हो गया हैं जहां वायरस का संक्रमण सबसे ज्यादा है। भारत जैसी विशाल आबादी वाले देश में प्रवासी मजदूरों की दुश्वारियां और ना बढ़े इसके लिए सरकार एवं स्थानीय प्रशासन को प्रवासी मजदूरों को जिला स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराएं, और सरकारी योजनाओं का उन्हें पूरा पूरा लाभ मिले ताकि वे आगे फीकाकशी का शिकार न बनने पाएं।
कोरोना से सबसे ज्यादा दिक्कत मजदूर भाईयो को हुआ है। इसलिए सरकार को मजदूर भाईयो पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
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